चतुर्युगाख्यान (Caturyuga-Ākhyāna) — Yuga-wise Origins and Measurements of Beings
यथाशयोपभोगास्तु देवानां शुभमूर्त्तयः / तेषां रूपानुरूपैस्तु प्रमाणैः स्थाणुजङ्गमैः
yathāśayopabhogāstu devānāṃ śubhamūrttayaḥ / teṣāṃ rūpānurūpaistu pramāṇaiḥ sthāṇujaṅgamaiḥ
देवों के शुभ रूप जैसे-जैसे उनके आशय और उपभोग के अनुसार हैं, वैसे ही स्थावर-जंगम प्राणी भी उनके रूप के अनुरूप प्रमाण (आकार) वाले होते हैं।