चतुर्युगाख्यान (Caturyuga-Ākhyāna) — Yuga-wise Origins and Measurements of Beings
मनोज्ञैस्तत्र भावैस्ते सुखिनो ह्युपपेदिरे / अतः शिष्टान्प्रवक्ष्यामि सतः साधूंस्तथैव च
manojñaistatra bhāvaiste sukhino hyupapedire / ataḥ śiṣṭānpravakṣyāmi sataḥ sādhūṃstathaiva ca
वहाँ मनोहर भावों के कारण वे सुखी होकर प्राप्त हुए; इसलिए अब मैं शिष्टों, सत्पुरुषों और साधुओं का वर्णन करता हूँ।