चतुर्युगाख्यान (Caturyuga-Ākhyāna) — Yuga-wise Origins and Measurements of Beings
उपयुक्ताः क्रियास्वेते यज्ञियास्विह सर्वशः / देवस्थानेषु जायन्ते तद्रूपा एव ते पुनः
upayuktāḥ kriyāsvete yajñiyāsviha sarvaśaḥ / devasthāneṣu jāyante tadrūpā eva te punaḥ
ये यहाँ यज्ञीय कर्मों में सर्वथा उपयोग में लाए जाते हैं, वे फिर देवस्थानों में उसी रूप से पुनः जन्म लेते हैं।