Amāvasyā-Pitṛtarpaṇa: Purūravas and the Soma-Based Ancestral Offering (अमावस्या-पितृतर्पण / सोमतर्पण-विधि)
नानारूपासु जायन्ते तिर्यग्योनिष्वयोनिषु / यदाहारा भवन्त्येते तासु तास्विह योनिषु
nānārūpāsu jāyante tiryagyoniṣvayoniṣu / yadāhārā bhavantyete tāsu tāsviha yoniṣu
वे अनेक रूपों में, तिर्यक् योनियों और अन्य योनियों में जन्म लेते हैं। जिस-जिस योनि में जैसा आहार होता है, वे वहीं वैसा ही आहार ग्रहण करने वाले बनते हैं।