Amāvasyā-Pitṛtarpaṇa: Purūravas and the Soma-Based Ancestral Offering (अमावस्या-पितृतर्पण / सोमतर्पण-विधि)
अप्राप्ता यातनास्थानं प्रभ्रष्टा य च पञ्चधा / पश्चाद्ये स्थावरान्ते वै जाता नीचैः स्वकर्मभिः
aprāptā yātanāsthānaṃ prabhraṣṭā ya ca pañcadhā / paścādye sthāvarānte vai jātā nīcaiḥ svakarmabhiḥ
जो यातना-स्थान तक भी नहीं पहुँचते, वे पाँच प्रकार से पतित होकर बाद में अपने नीच कर्मों से स्थावर-योनि तक जन्म लेते हैं।