पितृसर्ग-श्राद्धप्रश्नाः
Pitri-Origins and Shraddha Queries
दिव्याः पुण्या विपाप्मानो महात्मानो भवन्त्युत / ततो युगसहस्रान्ते जायन्ते ब्रह्मवादिनः
divyāḥ puṇyā vipāpmāno mahātmāno bhavantyuta / tato yugasahasrānte jāyante brahmavādinaḥ
वे दिव्य, पुण्य, पापरहित और महात्मा हो जाते हैं। फिर सहस्र युगों के अंत में वे ब्रह्म के वादी (ब्रह्मज्ञ) होकर जन्म लेते हैं।