पितृसर्ग-श्राद्धप्रश्नाः
Pitri-Origins and Shraddha Queries
लोभमोहभयोपेता निश्चिन्ताः शोक वर्जिताः / एते योगं परित्यज्य प्राप्ता लोकान्सुदर्शनान्
lobhamohabhayopetā niścintāḥ śoka varjitāḥ / ete yogaṃ parityajya prāptā lokānsudarśanān
वे लोभ, मोह और भय से युक्त होकर भी निश्चिन्त और शोक-रहित थे। इन लोगों ने योग को त्यागकर सुन्दर दर्शन वाले लोकों को प्राप्त किया।