पितृसर्ग-श्राद्धप्रश्नाः
Pitri-Origins and Shraddha Queries
प्रतिलभ्य पुनर्योगं मोक्षं गच्छन्त्यमूर्त्तयः / व्यक्ताव्यक्तं परित्यज्य महायोगबलेन च
pratilabhya punaryogaṃ mokṣaṃ gacchantyamūrttayaḥ / vyaktāvyaktaṃ parityajya mahāyogabalena ca
फिर योग को पुनः प्राप्त करके वे अमूर्त (सूक्ष्म) होकर मोक्ष को जाते हैं। महायोग के बल से वे व्यक्त और अव्यक्त—दोनों को त्याग देते हैं।