अमावसुवंशानुकीर्तनम् (Amāvasu-vaṃśānukīrtanam) — Recitation of the Amāvasu Lineage; Dhanvantari’s Origin
मद्रूपां प्रतिमां कृत्वा नगर्यन्ते निवेशय / तथा स्वप्ने यथा दृष्टं सर्वं कारितवान्द्विजः
madrūpāṃ pratimāṃ kṛtvā nagaryante niveśaya / tathā svapne yathā dṛṣṭaṃ sarvaṃ kāritavāndvijaḥ
मेरे स्वरूप की प्रतिमा बनवाकर उसने उसे नगर के भीतर स्थापित कराया। स्वप्न में जैसा देखा था, वैसा ही सब कुछ उस द्विज ने करवाया।