सगरदिग्विजयः
Sagara’s World-Conquest / Digvijaya
विना तां दुःखितो ऽत्यर्थं चितयामास नैकधा / अहो कष्टमपुत्रो ऽहमस्मिन्वंशे ध्रुवं तु यत्
vinā tāṃ duḥkhito 'tyarthaṃ citayāmāsa naikadhā / aho kaṣṭamaputro 'hamasminvaṃśe dhruvaṃ tu yat
उसके बिना वह अत्यन्त दुःखी होकर बार-बार सोचने लगा—“हाय! यह कितना कष्ट है; इस वंश में मैं निश्चय ही निःसंतान हूँ।”