सगरदिग्विजयः
Sagara’s World-Conquest / Digvijaya
इत्थं पालयतः पृथ्वीं सगरस्य महीपतेः / न चापपात मुत् पुत्रमुखालोकनजृंभिता
itthaṃ pālayataḥ pṛthvīṃ sagarasya mahīpateḥ / na cāpapāta mut putramukhālokanajṛṃbhitā
इस प्रकार महाराज सगर पृथ्वी का पालन करते हुए, पुत्र के मुख-दर्शन से उत्पन्न हर्ष में कभी भी विचलित न हुए।