सगरदिग्विजयः
Sagara’s World-Conquest / Digvijaya
प्रयान्ति नूनमस्माकं पितरः पिण्डविप्लवम् / निरयादपि सत्पुत्रे संजाते पितरः किल
prayānti nūnamasmākaṃ pitaraḥ piṇḍaviplavam / nirayādapi satputre saṃjāte pitaraḥ kila
निश्चय ही हमारे पितर पिण्ड-तर्पण के अभाव से संकट में पड़ते हैं; क्योंकि सत्पुत्र के जन्म से पितर नरक से भी मुक्त हो जाते हैं।