Bhārgava-Stuti and Kṛṣṇa’s Vara
Devotional Hymn and Boon to the Bhargava
हरनिकट निवासी कृष्णसेवाविलासी प्रणतजनविभासी गोपकन्याप्रहासी / हरकृतबहुमानो गोपिकेशैकतानो विदितबहुविधानो जायतां कीर्तिहा नौ
haranikaṭa nivāsī kṛṣṇasevāvilāsī praṇatajanavibhāsī gopakanyāprahāsī / harakṛtabahumāno gopikeśaikatāno viditabahuvidhāno jāyatāṃ kīrtihā nau
जो हरि के निकट निवास करते हैं, कृष्ण-सेवा में रमण करते हैं; शरणागत जनों को प्रकाश देते हैं, गोप-कन्याओं के साथ हँसते-खेलते हैं। जिन्हें हरि ने बहुत मान दिया, जो गोपिकाओं के स्वामी में एकाग्र हैं, अनेक प्रकार से प्रसिद्ध हैं—वे कीर्तिहा (कीर्ति-वर्धक) हमारे लिए कल्याणकारी हों।