Nakṣatra-Śrāddha (Ancestral Rites Connected with Asterisms) — नक्षत्रश्राद्धम्
यत्किञ्चित्स्पृशते तोयमवतीर्णो नदीजले / वृषोत्सर्ग्गत्पितॄणां तु ह्यक्षयं समुदाहृतम्
yatkiñcitspṛśate toyamavatīrṇo nadījale / vṛṣotsarggatpitṝṇāṃ tu hyakṣayaṃ samudāhṛtam
नदी के जल में उतरकर वह जो भी जल स्पर्श करता है, वृषोत्सर्ग से पितरों के लिए वह सब अक्षय फल कहा गया है।