उभाव् एतौ क्षराव् उक्तौ उभाव् एताव् अनक्षरौ कारणं तु प्रवक्ष्यामि यथाज्ञानं तु ज्ञानतः //
इस अध्याय का ग्यारहवाँ श्लोक धर्म और अर्थ का विवेचन करने वाला है।