विद्याविद्ये तु तत्त्वेन मयोक्ते वै विशेषतः अक्षरं च क्षरं चैव यद् उक्तं तन् निबोध मे //
इस अध्याय का यह दसवाँ श्लोक पवित्र अर्थ प्रदान करने वाला माना गया है।