अनादिनिधनाव् एतौ उभाव् एवेश्वरौ मतौ तत्त्वसंज्ञाव् उभाव् एव प्रोच्येते ज्ञानचिन्तकैः //
बारहवाँ श्लोक श्रुति-स्मृति के सार को संक्षेप में प्रकट करता है।