ज्ञानम् अव्यक्तम् इत्य् उक्तं ज्ञेयं वै पञ्चविंशकम् तथैव ज्ञानम् अव्यक्तं विज्ञाता पञ्चविंशकः //
नवम श्लोक—यहाँ ‘९’ से सूचित वचन भक्ति और शांति का प्रसाद देता है।