लक्षणं तु प्रसादस्य यथा स्वप्ने सुखं भवेत् निर्वाते वा यथा दीपो दीप्यमानो न कम्पते //
यह इकतीसवाँ श्लोक-संख्या है; मूल श्लोक यहाँ उपलब्ध नहीं है।