गर्भजन्मजराद्येषु स्थानेषु प्रभविष्यतः निरस्तातिशयाह्लादं सुखभावैकलक्षणम् //
यह अध्याय 234 का श्लोक 56 है; पाठ-विवरण यहाँ उपलब्ध नहीं है।