भेषजं भगवत्प्राप्तिर् एका चात्यन्तिकी मता तस्मात् तत्प्राप्तये यत्नः कर्तव्यः पण्डितैर् नरैः //
यह अध्याय 234 का श्लोक 57 है; मूल वाक्य यहाँ प्रदर्शित नहीं हैं।