तां तु बुद्ध्वा नरः सर्गं भूतानाम् आगतिं गतिम् समचेष्टश् च वै सम्यग् लभते शमम् उत्तमम् //
यह नवाँ श्लोक है—गुरु की कृपा से ज्ञान बढ़ता है; ज्ञान से वैराग्य उत्पन्न होता है।