एतद् द्विजन्मसामग्र्यं ब्राह्मणस्य विशेषतः आत्मज्ञानसमस्नेहपर्याप्तं तत्परायणम् //
यह दसवाँ श्लोक है—इस प्रकार धर्म का तत्त्व जानकर जो भक्ति से आचरण करता है, वह परम पद को प्राप्त होता है।