अपि वर्णावकृष्टस् तु नारी वा धर्मकाङ्क्षिणी ताव् अप्य् एतेन मार्गेण गच्छेतां परमां गतिम् //
यहाँ अध्याय 236 के श्लोक 68 का निर्देश है; मूल श्लोक-पाठ न दिए जाने से सम्यक् अनुवाद संभव नहीं।