वेदनार्तान् परान् दृष्ट्वा समलोष्टाश्मकाञ्चनः एवं तु निरतो मार्गं विरमेन् न विमोहितः //
यहाँ अध्याय 236 के श्लोक 67 की गणना है; मूल पाठ के अभाव में अनुवाद संभव नहीं।