एतन् निःश्रेयसकरं ज्ञानं भोः परमं मया कथितं तत्त्वतो विप्राः श्रुत्वा देवर्षितो द्विजाः //
यह 44वाँ श्लोक है, पर मूल संस्कृत-पाठ उपलब्ध नहीं है; इसलिए यथार्थ अनुवाद संभव नहीं। कृपया श्लोक का पाठ दें।