पुनरावृत्तिम् आप्नोति परमं ज्ञानम् अव्ययम् नाति बुध्यति तत्त्वेन बुध्यमानो ऽजरामरम् //
यह 43वाँ श्लोक है, पर मूल संस्कृत-पाठ उपलब्ध नहीं है; इसलिए यथार्थ अनुवाद संभव नहीं। कृपया श्लोक का पाठ दें।