मुखसमः संक्रमः संहार्यो भूमिमयो वा निरुदके ॥ कZ_०२.३.३० ॥
mukhasamaḥ saṃkramaḥ saṃhāryo bhūmimayo vā nirudake
संक्रम (आगमन-पथ) द्वार-मुख के समरेख हो; वह हटाने योग्य हो, या जहाँ जल न हो वहाँ मिट्टी/भूमि से बना हो।
It allows the defender to deny entry quickly during attack, converting access routes into obstacles.