नलस्य बाहुकत्वेन ऋतुपर्णनगरप्रवेशः
Nala as Bāhuka enters Ṛtuparṇa’s city
कन्दरांश्व नितम्बांश्न नदीश्वाद्भुतदर्शना: । ददर्श तान् भीमसुता पतिमन्वेषती तदा,उसने अनेक प्रकारके वृक्ष, अनेकानेक सरिताओं, बहुसंख्यक रमणीय पर्वतों, अनेक मृग-पक्षियों, पर्वतकी कन्दराओं तथा उनके मध्यभागों और हम देखा। पतिका अन्वेषण करनेवाली दमयन्तीने उस समय पूर्वोक्त सभी वस्तुओंको देखा। इस तरह बहुत दूरतकका मार्ग तय कर लेनेके बाद पवित्र मुसकानवाली दमयन्तीने एक बहुत बड़े सार्थ (व्यापारियोंके दल)-को देखा, जो हाथी, घोड़े तथा रथसे व्याप्त था। वह व्यापारियोंका समूह स्वच्छ जलसे सुशोभित एक सुन्दर रमणीय नदीको पार कर रहा था। नदीका जल बहुत ठंडा था। उसका पाट चौड़ा था। उसमें कई कुण्ड थे और वह किनारेपर उगे हुए बेंतके वृक्षोंसे आच्छादित हो रही थी
Bṛhadaśva uvāca: kandarāṃś ca nitambāṃś ca nadīś cādbhuta-darśanāḥ | dadarśa tān bhīmasutā patim anvēṣatī tadā ||
Bṛhadaśva said: As Damayantī, the daughter of Bhīma, searched for her husband, she beheld wondrous rivers, mountain caves, and the slopes and ridges of the hills; and amid hardship she pressed on through the wild, steadfast in a wife’s dharma.
बृहृदश्च उवाच