गदायुद्धप्रतिज्ञा — The Vow and Terms of the Mace Duel
दुर्योधन उवाच यदर्थ राज्यमिच्छामि कुरूणां कुरुनन्दन । त इमे निहता:ः सर्वे भ्रातरो मे जनेश्वर,दुर्योधन बोला--कुरुनन्दन नरेश्वर! मैं जिनके लिये कौरवोंका राज्य चाहता था, वे मेरे सभी भाई मारे जा चुके हैं। भूमण्डलके सभी क्षत्रियशिरोमणियोंका संहार हो गया है। यहाँके सभी रत्न नष्ट हो गये हैं; अतः विधवा स्त्रीके समान श्रीहीन हुई इस पृथ्वीका उपभोग करनेके लिये मेरे मनमें तनिक भी उत्साह नहीं है
duryodhana uvāca | yadarthaṁ rājyam icchāmi kurūṇāṁ kurunandana | te ime nihatāḥ sarve bhrātaro me janeśvara |
Duryodhana said: “O delight of the Kurus, O lord among men! For the sake of whom I desired the sovereignty of the Kurus—those very brothers of mine have all been slain.”
दुर्योधन उवाच