अध्याय ९ — कर्णस्य प्रहारः, योधयुग्मनियोजनम्, शैनेय-कैकेययोर्युद्धविन्यासः
(दाक्षिणात्य अधिक पाठके १६३ श्लोक मिलाकर कुल ३२६ “लोक हैं।) #द-2ल्5 >> श््यु # ++/<< नवमो<्ध्याय: धृतराष्ट्रका संजयसे विलाप करते हुए कर्णवधका विस्तारपूर्वक वृत्तान्त पूछना संजय उवाच श्रिया कुलेन यशसा तपसा च श्रुतेन च । त्वामद्य सन््तो मन्यन्ते ययातिमिव नाहुषम्,संजयने कहा--महाराज! साधु पुरुष इस समय आपको धन-सम्पत्ति, कुल-मर्यादा, सुयश, तपस्या और शास्त्रज्ञानमें नहुषनन्दन ययातिके समान मानते हैं
sa jaya uv01ca |
rriy01 kulena ya5bas01 tapas01 ca 5brutena ca |
tv01m adya santa0d manyante yay01tim iva n01hu63am ||
Sanjaya said: “O King, the virtuous now regard you as Yayāti, son of Nāhuṣa—endowed with prosperity, noble lineage, fame, ascetic merit, and sacred learning.”
संजय उवाच