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Shloka 28

उत्कृत्य वक्ष: पतितस्य भूमा- वथापिबच्छोणितमस्य कोष्णम्‌ | ततो निपात्यास्य शिरोडपकृत्य तेनासिना तव पुत्रस्य राजन्‌,इसके बाद पृथ्वीपर पड़े हुए दुःशासनकी छाती फाड़कर वे उसका गरम-गरम रक्त पीनेका उपक्रम करने लगे। राजन्‌! उठनेकी चेष्टा करते हुए दुःशासनको पुनः गिराकर बुद्धिमान्‌ भीमसेनने अपनी प्रतिज्ञा सत्य करनेके लिये तलवारसे आपके पुत्रका मस्तक काट डाला और उसके कुछ-कुछ गरम रक्तको वे स्वाद ले-लेकर पीने लगे। फिर क्रोधमें भरकर उसकी ओर देखते हुए इस प्रकार बोले---

संजय उवाच