अस्त्रयुद्धे द्रौणिपार्थसंघर्षः — Karṇa’s Bhārgavāstra and the Search for Yudhiṣṭhira
Chapter 45
कृप: शारद्वतो राजन् मागधाश्व तरस्विन: । सात्वत: कृतवर्मा च दक्षिणं पक्षमाश्रिता:,नरेश्वर! शरद्वानके पुत्र कृपाचार्य, वेगशाली मागध वीर और सात्वतवंशी कृतवर्मा--ये व्यूहके दाहिने पक्षका आश्रय लेकर खड़े थे। महारथी शकुनि और उलूक चमचमाते हुए प्रासोंसे सुशोभित घुड़सवारोंके साथ उनके प्रपक्षमें स्थित हो आपके व्यूहकी रक्षा कर रहे थे
sañjaya uvāca |
kṛpaḥ śāradvato rājan māgadhāśva-tarasvinaḥ |
sātvataḥ kṛtavarmā ca dakṣiṇaṃ pakṣam āśritāḥ ||
Sañjaya said: O King, Kṛpa Śāradvata, the swift Magadhan horsemen, and Sātvata Kṛtavarmā took position on the right wing of the battle-array.
संजय उवाच