कर्णेन व्यूहविधानम् — Karṇa’s Battle Formation and the Pāṇḍava Counter-Plan
Adhyāya 31
गदां च पश्य गान्धारे हेमपट्टविभूषिताम् । तुम्हें युद्धमें किसी प्रकार मेरा अपमान नहीं करना चाहिये। तुम मेरी मोटी और वज्रके समान गँठीली इन सुदृढ़ भुजाओंको तो देखो। मेरे इस विचित्र धनुष और विषधर सर्पके समान इन विषैले बाणोंकी ओर तो दृष्टिपात करो। गन्धारीकुमार! वायुके समान वेगशाली उत्तम घोड़ोंसे जुते हुए मेरे इस सजे-सजाये रथ और सुवर्णपत्रसे मढ़ी हुई गदापर भी तो दृष्टि डालो || ३७-३८ $ ।। दारयेयं महीं कृत्स्नां विकिरेयं च पर्वतान्
gadāṁ ca paśya gāndhāre hemapaṭṭavibhūṣitām | dārayeyaṁ mahīṁ kṛtsnāṁ vikireyaṁ ca parvatān ||
And look also, O son of Gāndhārī, at my mace adorned with bands of gold. I could split the entire earth and scatter the mountains.
शल्य उवाच