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Shloka 19

मन्दर-समुद्रमन्थन-वर्णनम् / Description of the Churning of the Ocean with Mount Mandara

शरीरेणासमग्रेण तस्माद्‌ दासी भविष्यसि । पञ्चवर्षशतान्यस्या यया विस्पर्धथसे सह,सुना जाता है, उस पुत्रने क्रोधके आवेशमें आकर विनताको शाप दे दिया--“माँ! तूने लोभके वशीभूत होकर मुझे इस प्रकार अधूरे शरीरका बना दिया--मैरे समस्त अंगोंको पूर्णतः: विकसित एवं पुष्ट नहीं होने दिया; इसलिये जिस सौतके साथ तू लाग-डाँट रखती है, उसीकी पाँच सौ वर्षोतक दासी बनी रहेगी

„Wegen meines unvollständigen Leibes wirst du zur Magd werden. Fünfhundert Jahre lang wirst du derjenigen dienen, mit der du rivalisierst und im Streit liegst.“

शौनक उवाच