एवंवृत्तं सदा क्षात्रं युध्यन्तीह गुरूनपि । यदि ते<हं प्रियो राजन् जहि मां मा चिरं कृथा:,संजय कहते हैं--महाराज! ऐसी बात कहनेवाले राजा दुर्योधनसे सात्यकिने इस प्रकार कहा--'राजन! क्षत्रियोंका सनातन आचार ही ऐसा है कि वे यहाँ गुरुजनोंके साथ भी युद्ध करते हैं। यदि मैं तुम्हारा प्रिय हूँ तो तुम मुझे शीघ्र मार डालो, विलम्ब न करो
evaṁvṛttaṁ sadā kṣātraṁ yudhyantīha gurūn api | yadi te 'haṁ priyo rājan jahi māṁ mā ciraṁ kṛthāḥ ||
قال سَنجايا: «يا أيها الملك، هكذا كان على الدوام سُننُ المحارب: هنا يُقاتَل حتى الشيوخُ والمعلّمون. فإن كنتُ عزيزًا عليك، أيها الملك، فاضربني قتيلاً في الحال—ولا تُمهِل.»
संजय उवाच