निविष्टान् पाण्डवांश्वैव प्रीयमाणान् महारथान् । भीष्मस्य पतने हृष्टानुपगम्य महाबल:,पाण्डव महारथी भीष्मके गिर जानेसे बहुत प्रसन्न थे और हर्षमें भरकर विश्राम कर रहे थे। उस समय महाबली भगवान् श्रीकृष्ण यथासमय उनके पास पहुँचकर धर्मपुत्र युधिष्ठिरसे इस प्रकार बोले--“कुरुनन्दन! सौभाग्यकी बात है कि तुम जीत रहे हो। यह भी भाग्यकी ही बात है कि भीष्म रथसे गिरा दिये गये
niviṣṭān pāṇḍavāṃś caiva prīyamāṇān mahārathān | bhīṣmasya patane hṛṣṭān upagamya mahābalaḥ ||
قال سانجيا: لما رأى عظماء فرسان العربة من الباندافا جالسين في راحة، مسرورين ومبتهجين بسقوط بهِيشما، دنا منهم ذو البأس في الوقت الملائم. ويُظهر هذا المشهد أن النصر—even في حربٍ عادلة—يحمل مشاعر متشابكة: ارتياحًا وفرحًا عند منعطف حاسم، غير أنه يظل مُظلَّلًا بثقل سقوط شيخٍ مُبجَّل وبمطالب الدارما في السلوك وضبط النفس.
संजय उवाच