Vainya-Aśvamedhe Atri–Gautama–Sanatkumāra-Nirṇaya
Vainya’s Sacrifice and the Settlement of a Dharmic Dispute
आकाशनीकाशतटां तीरवानीरसंकुलाम् । बभूव चरतां हर्ष: पुण्यतीर्था सरस्वतीम्,पावन तीर्थोंसे विभूषित सरस्वती नदीका तट आकाशके समान निर्मल दिखायी देता था। उसके दोनों किनारे बेंतकी लहलहाती हुई लताओंसे आच्छादित थे। वहाँ विचरते हुए पाण्डवोंको बड़ा आनन्द मिलता था
毗湿摩耶那说道:萨拉斯瓦蒂河岸以诸多清净圣渡(tīrtha)为饰,洁白澄明,宛如长空。两岸又为葱茏摇曳的藤蔓与芦竹(cane)所覆。般度五子徜徉其间,心中大为欢悦。
वैशम्पायन उवाच