धृतराष्ट्रस्य मूर्च्छा—व्यासोपदेशः
Dhṛtarāṣṭra’s Collapse and Vyāsa’s Counsel
कथं ते शोकनाश: स्यात् प्राणेषु च दया प्रभो । स्नेहश्न पाण्डुपुत्रेषु ज्ञात्वा दैवकृतं विधिम्,प्रभो! नारदजीकी वह बात सुनकर उस समय पाण्डव बहुत चिन्तित हो गये थे। इस प्रकार मैंने तुमसे देवताओंका यह सारा सनातन रहस्य बताया है, जिससे किसी तरह तुम्हारे शोकका नाश हो। तुम अपने प्राणोंपर दया कर सको और देवताओंका विधान समझकर पाण्डुके पुत्रोंपर भी तुम्हारा स्नेह बना रहे
kathaṁ te śokanāśaḥ syāt prāṇeṣu ca dayā prabho | snehāś ca pāṇḍuputreṣu jñātvā daivakṛtaṁ vidhiṁ prabho ||
毗耶娑(Vyāsa)说道:“主上,你的悲恸如何方能止息?你又如何能对自身性命生起怜悯?并且,当你明了由神意所成的法度之后,你对般度(Pāṇḍu)诸子的慈爱又如何得以长存?”
व्यास उवाच