अहं हनिष्ये स्वशरीरमेव प्रसह्य येनाहितमाचरं वै | पुरुषोत्तम भगवान् श्रीकृष्णके इस प्रकार पूछनेपर अर्जुन अत्यन्त दुःखी हो उनसे इस प्रकार बोले--'भगवन्! मैंने जिसके द्वारा हठपूर्वक भाईका अपमानरूप अहितकर कार्य कर डाला है
至上之主、薄伽梵室利·奎师那如此发问时,阿周那悲痛至极,答道:“世尊!正是凭此身,我执拗地做下了害人的恶行——对兄长的侮辱。如今,我要毁灭的,便是这具身体本身。”
संजय उवाच