कर्णनिधनवृत्तान्तनिवेदनम् | Reporting Karṇa’s Fall to Yudhiṣṭhira
अवधेन वध: प्रोक्तो यद् गुरुस्त्वमिति प्रभु: । तद् ब्रूहि त्वं यन्मयोक्तं धर्मराजस्य धर्मवित्,उस श्रुतिका भाव यह है--“गुरुको तू कह देना उसे बिना मारे ही मार डालना है।” तुम धर्मज्ञ हो तो भी जैसा मैंने बताया है, उसके अनुसार धर्मराजके लिये “तू” शब्दका प्रयोग करो
伐由说道:“那则闻传的旨意是:‘以“tvam”称呼师长,便是“不杀而杀”。’因此,纵然你通晓正法,也当依我所言,对达摩王用‘tvam’之称。”
वायुदेव उवाच