Śukasya Janma-yoga-phalaṁ — Vyāsasya Tapasā Putrārthaḥ (Śānti-parva 310)
न तवाविदितं किंचिन्मां तु जिज्ञासते भवान् । पृष्टेन चापि वक्तव्यमेष धर्म: सनातन:,यद्यपि तुमसे कोई भी विषय अज्ञात नहीं है, फिर भी मुझसे पूछते हो तो कहना ही पड़ता है; क्योंकि किसीके पूछनेपर जानकार मनुष्यको उसके प्रश्नका उत्तर देना ही चाहिये। यही सनातन धर्म है
تمہارے لیے کوئی بات نامعلوم نہیں؛ پھر بھی تم مجھ سے دریافت کرتے ہو۔ اور جب پوچھا جائے تو بتانا ہی چاہیے—یہی سناتن دھرم ہے۔
याज़्ञवल्क्य उवाच