मृदु-तीक्ष्ण-नीति तथा दुष्टलक्षण-विज्ञानम्
Measured Policy and the Recognition of Malicious Disposition
न सामदण्डोपनिषत् प्रशस्यते । नमार्दवं शत्रुषु यात्रिकं सदा | न सस्यघातो न च संकरक्रिया न चापि भूय: प्रकृते्विचारणा,शत्रुके प्रति सामनीतिका प्रयोग अच्छा नहीं माना जाता, बल्कि गुप्तरूपसे दण्डनीतिका प्रयोग ही श्रेष्ठ समझा जाता है। शत्रुओंके प्रति न तो कोमलता और न उनपर आक्रमण करना ही सदा ठीक माना जाता है। उनकी खेतीको चौपट करना तथा वहाँके जल आदिमें विष मिला देना भी अच्छा नहीं है। इसके सिवा, सात प्रकृतियोंपर विचार करना भी उपयोगी नहीं है (उसके लिये तो गुप्त दण्डका प्रयोग ही श्रेष्ठ है)
na sāma-daṇḍopaniṣat praśasyate | na mārḍavaṁ śatruṣu yātrikaṁ sadā | na sasyaghāto na ca saṅkarakriyā na cāpi bhūyaḥ prakṛti-vicāraṇā |
دشمن کے بارے میں ایسی پالیسی جس میں علانیہ طور پر سام اور دَند کو ملا دیا جائے، قابلِ تعریف نہیں۔ نہ دشمنوں کے ساتھ نرمی ہمیشہ درست ہے، اور نہ ہر وقت حملہ آور رہنا ہی لازماً مناسب۔ دشمن کی کھیتی برباد کرنا یا ان کے پانی وغیرہ میں زہر ملانا جیسے فریب آمیز کام بھی پسندیدہ نہیں۔ اور ایسے موقع پر ریاست کے اجزاء پر بار بار غور و فکر کرنا بھی زیادہ مفید نہیں؛ بلکہ دشمن کے مقابلے میں پوشیدہ، درست نشانے والی اور مناسب تعزیری کارروائی کو بہتر سمجھا گیا ہے۔
भीष्म उवाच