Vāraṇāvata-prasaṃsā and the Pāṇḍavas’ Departure (वरणावत-प्रशंसा तथा पाण्डव-प्रयाणम्)
अथ द्रोण: कुमारांस्तान् दृष्टवा कृत्यवतस्तदा । प्रहस्य मन्दं पैशल्यादभ्यभाषत वीर्यवान्,तदनन्तर पराक्रमी द्रोण यह देखकर कि इन कुमारोंका अभीष्ट कार्य पूर्ण नहीं हुआ है “-ये उसी प्रयोजनसे मेरे पास आये हैं, उस समय मन्द मुसकराहटके साथ बड़े कौशलसे बोले--
پھر پرَاکرمی درون نے یہ دیکھ کر کہ ان کماروں کا مطلوبہ کام ابھی پورا نہیں ہوا اور وہ اسی غرض سے اس کے پاس آئے ہیں، ہلکی سی مسکراہٹ کے ساتھ بڑی مہارت سے کہا—
वैशग्पायन उवाच