द्रौपदी-भीमसेनसंवादः
Draupadī–Bhīmasena Dialogue on Suffering, Kāla, and Daiva
अभ्यकीर्यन्त वृन्दानि दामग्रन्थिमुदीक्ष्य तम् । विनयन्तं जवेनाश्वान् महाराजस्य पश्यत:,जिसे देखकर शत्रुओंके समुदाय बिखर जाते--भाग खड़े होते हैं, वही अब ग्रन्थिक बनकर घोड़ोंकी रास खोलता और बाँचता है तथा महाराजके सामने अश्वोंको वेगसे चलनेकी शिक्षा देता है
“ผู้ซึ่งเมื่อปรากฏกายก็ทำให้หมู่ศัตรูแตกกระเจิง บัดนี้กลับเป็นดามครันถี คอยคลายและผูกเชือกบังเหียนม้า และต่อหน้ามหาราชก็ฝึกม้าให้วิ่งด้วยความเร็ว”
वैशम्पायन उवाच