द्रौपदी-भीमसेनसंवादः
Draupadī–Bhīmasena Dialogue on Suffering, Kāla, and Daiva
यस्त्रिभिननित्यसम्पन्नो रूपेणास्त्रेण मेधया । सो<श्चबन्धो विराटस्य पश्य कालस्य पर्ययम् ४२ ।। इसी प्रकार जो सुन्दर रूप, अस्त्रबल और मेधाशक्ति--इन तीनोंसे सदा सम्पन्न रहता है, वह वीरवर नकुल आज विराटके यहाँ घोड़े बाँधता है। देखो, कालकी कैसी विपरीत गति है?
“ผู้ซึ่งพร้อมพรั่งอยู่เสมอด้วยสามประการ—รูปโฉม ความชำนาญอาวุธ และปัญญา—บัดนี้กลับเป็นผู้ผูกม้าในเรือนของวิราฏะ จงดูเถิด ความผันผวนของกาลช่างกลับตาลปัตรเพียงใด!”
वैशम्पायन उवाच