Virāṭa-parva Adhyāya 13 — Kīcaka’s Proposition and Draupadī’s Dharmic Refusal
भीमसेनो<पि मांसानि भक्ष्याणि विविधानि च । अतिसृष्टानि मत्स्येन विक्रीणीते युधिष्ठिरे,भीमसेन भी नाना प्रकारके भक्ष्य-भोज्य पदार्थ, जो मत्स्यनरेशद्वारा उन्हें पुरस्काररूपमें प्राप्त होते, बेच देते और उससे मिला हुआ धन युधिष्ठिरकी सेवामें अर्पित करते थे
ภีมเสนะก็เช่นกัน นำเนื้อและของกินนานาชนิดซึ่งได้มาเป็นรางวัลจากพระราชามัตสยะไปขาย แล้วนำเงินที่ได้จากการขายนั้นถวายเพื่อรับใช้ยุธิษฐิระ
वैशम्पायन उवाच