Arjuna Honored in Indra’s Court; Lomāśa’s Audience; Indra’s Disclosure of Lineage and Mission
Book 3, Chapter 45
गन्धर्वराज गच्छाद्य प्रहितो5प्सरसां वराम् । उर्वशीं पुरुषव्याघप्र सोपातिष्ठतु फाल्गुनम्,“गन्धर्वराज! तुम मेरे भेजनेसे आज अप्सराओंमें श्रेष्ठ उर्वशीके पास जाओ। पुरुषश्रेष्ठ! तुम्हें वहाँ भेजनेका उद्देश्य यह है कि उर्वशी अर्जुनकी सेवामें उपस्थित हो
“โอ ราชาแห่งคันธรรพ์ จงไปในวันนี้ตามที่เราส่งเจ้าไปหาอุรวศี ผู้เลิศในหมู่อัปสรา โอ บุรุษผู้ประดุจพยัคฆ์ จุดหมายคือให้อุรวศีไปอยู่ปรนนิบัติฟาลคุนะ (อรชุน)”
वैशम्पायन उवाच