Yudhiṣṭhira’s Lament on Kāla and Daiva after Draupadī’s Recovery (आरण्यक पर्व, अध्याय २५७)
ते प्रयाता यथोद्दिष्टा दूतास्त्वरितवाहना: । तत्र कंचित् प्रयातं तु दूतं दःशासनो<ब्रवीत्,दूतगण तेज चलनेवाले वाहनोंपर सवार हो जिन्हें जैसी आज्ञा मिली थी, उसके अनुसार कर्तव्यपालनके लिये प्रस्थित हुए। उन्हींमेंसे एक जाते हुए दूतसे दुःशासनने कहा --
เหล่าทูตทั้งหลายออกเดินทางตามที่ได้รับบัญชา ขึ้นพาหนะอันรวดเร็วเพื่อปฏิบัติหน้าที่; ครั้นเห็นทูตผู้หนึ่งกำลังไป ทุศศาสนะจึงกล่าวแก่เขาว่า—
वैशम्पायन उवाच