Rāma–Jāmadagnya-janma-kāraṇa and Kṣatra-kṣaya
Paraśurāma’s origins and the depletion/restoration of kṣatriya lineages
मातुस्ते ब्राह्मणो भूयात् तव च क्षत्रिय: सुतः । परंतु तुम्हारा भाई ब्राह्मणस्वरूप एवं तपस्यापरायण होगा। तुम्हारे चरुमें मैंने सम्पूर्ण महान् तेज ब्रह्मकी प्रतिष्ठा की थी और तुम्हारी माताके लिये जो चरु था, उसमें सम्पूर्ण क्षत्रियोचित बल-पराक्रमका समावेश किया गया था, परंतु कल्याणि! चरुके बदल देनेसे अब ऐसा नहीं होगा। तुम्हारी माताका पुत्र तो ब्राह्मण होगा और तुम्हारा क्षत्रिय” || १९-२० >3॥ सैवमुक्ता महाभागा भर्त्रां सत्यवती तदा,पतिके ऐसा कहनेपर महाभागा सत्यवती उनके चरणोंमें सिर रखकर गिर पड़ी और काँपती हुई बोली--'प्रभो! भगवन्! आज आप मुझसे ऐसी बात न कहें कि तुम ब्राह्मणाधम पुत्र उत्पन्न करोगी”
mātus te brāhmaṇo bhūyāt tava ca kṣatriyaḥ sutaḥ |
ขอให้บุตรของมารดาเจ้าเป็นพราหมณ์ และบุตรของเจ้าเองเป็นกษัตริย์
वायुदेव उवाच